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SC/ST आरक्षण पर विरोधी फैला रहे थे अफ़वाह लेकिन एक ही झटके में अमित शाह ने सबकी बोलती की बंद

अनुसूचित जाती/जनजाति एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किये गए फेरबदल के विरोध में 2 अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया गया था और इसी भारत बंद की आड़ में फिर देश के कई हिस्सों में आगजनी, तोड़फोड़, हिंसा, छेड़छाड़, लूटपाट, और खून खराबा भी किया गया. कई घायल हुए तो कई इस बेवकूफी भरे कदम के चलते मरे भी, लेकिन ये सब क्यों हुआ क्या आप जानते हैं? नहीं जानते होंगे, तो हम आपको बताते हैं. दरअसल जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट में फेरबदल की बात की, इस खबर तो तोड़-मरोड़ कर लोगों के सामने पेश किया गया और इसका नतीजा ये हुआ कि देश में दंगे फ़ैल गए.

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याद हो तो दंगों के बाद खुद सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बयान देते हुए कहा था कि, “फैसले पर रोक नही लोगों ने फैसले को ठीक से नही पढ़ा है.” सुप्रीम कोर्ट ने अपना पक्ष रखते हुए साफ़ किया था कि, “सुप्रीम कोर्ट किसी भी सूरत में SC/ST एक्ट के खिलाफ नहीं हैं. हम इस बात के खिलाफ हैं कि इस एक्ट के चलते निर्दोषों को सजा दी जाती है जो नहीं मिलनी चाहिए. हम दावे से कह सकते हैं कि जो लोग सड़क पर उपद्रव करने उतरे हैं उन्होंने हमारा जजमेंट भी ध्यान से नहीं पढ़ा होगा. हमें सिर्फ उन निर्दोष लोगों की चिंता हैं जो जेलों में बंद हैं.”

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यानी की जिन लोगों ने आरक्षण के नाम पर पहले भारत बंद और फिर दंगा किया उन्हें असल में फैसला समझ आया ही नहीं था?  

इस गंभीर मुद्दे पर विपक्ष ने समय समय पर सिर्फ इस बेवजह की आग को बढ़ावा ही दिया है. याद हो तो इन दंगों से पहले राहुल गाँधी ने भी ये कहकर दलितों को इन दंगों के लिए बढ़ावा दिया था कि, “उन दलितों को मेरा सलाम जो फैसला का विरोध कर रहे हैं.” ऐसे में आप खुद समझ सकते हैं कि कैसे इतने नाज़ुक मामले पर भी विपक्ष ने सिर्फ-और-सिर्फ राजनीति की है. ऐसे में विपक्ष के मुंह पर करार तमाचा मारते हुए अमित शाह ने इस आरक्षण के मुद्दे पर अब ऐसा बयान दिया है जिसे सुनने के बाद बहुत से लोगों की बोलती बंद होनी तय है.

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अमित शाह ने SC/ST आरक्षण के मुद्दे पर एक हाहाकारी फैसला देते हुए कहा है कि, “केंद्र सरकार शिक्षा और नौकरियों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिये आरक्षण की नीति को न तो रद्द करेगी और न ही किसी को ऐसा करने देगी. बीआर अम्बेडकर ने संविधान में तय किया था कि आरक्षण नीति को कोई भी नहीं बदल सकता है.”

ये बयान अमित शाह ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए दिया है. उन्होंने आगे ये भी कहा कि, “मुझे समझ नहीं आ रहा है कि आखिर बंद का आवाह्न ही क्यों किया गया, जब पीएम मोदी जी ने लोगों को आश्वासन दिया था कि सरकार इस फैसले के खिलाफ़ पुनर्विचार याचिका दायर करेगी.”

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ऐसे में दंगे क्यूँ हुए? लोग क्यूँ मारे गए? जान-माल को जो नुकसान हुआ वो क्यूँ हुआ?

इस मुद्दे पर भी अपना पक्ष रखते हुए अमित शाह ने कहा कि, “जो भी जानें इस दुखद हादसे में गयी हैं इसमें कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल (जिन्होंने समय-समय पर  इन दंगों को सिर्फ बढ़ावा दिया है)  का सारा दोष है.”

जान लीजिये क्या होता है SC/ST एक्ट?

SC/ST एक्ट को 11 सितम्बर साल 1989 में भारत की संसद ने पारित किया था. इसके बाद 30 जनवरी साल 1990 से ये कानून (अत्याचार निरोधक कानून) सारे भारत में (जम्मू-कश्मीर के अलावा) लागू कर दिया गया. देश की अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के पक्ष में बनाया गया ये ख़ास कानून हर उस इंसान पर लागू किया जाता है जो किसी भी तरीके से SC/ST लिस्ट में शामिल व्यक्ति का उत्पीड़न करता है. इस अधिनियम में कुल 5 अध्याय और 23 धाराएं हैं. इस कानून के अंतर्गत हर उस इंसान को दण्ड दिया जाता है जो की भी SC/ST में शामिल व्यक्ति पर जुर्म करता है. इस अधिनियम के लिए विशेष अदालतों की भी व्यवस्था होती है.

ऐसे में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला किया कि इस SC/ST एक्ट का संशोधन किया जाएगा और सरकार के इसी फैसले के खिलाफ़ भारत बंद और दंगे जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया. भारत बंद का ये असर कई जगहों पर देखने को मिला. 

सुप्रीम कोर्ट के इस संशोधन के मुताबिक अब ST/SC एक्ट के तहत होने वाली तत्काल गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने  तुरंत गिरफ़्तारी रोकने के साथ ही आदेश दिया है कि ST/SC एक्ट के तहत किसी भी इंसान की तुरंत गिरफ्तारी न की जाए बल्कि अग्रिम जमानत की मंज़ूरी दी जाए. 

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