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भारत बंद में दलितों की आड़ में गुंडई करने वालों के लिए CM योगी ने उठाया बड़ा कदम, जानकर उपद्रवियों की रूह कांप जायेगी

11 सितंबर 1989 में भारतीय संसद द्वारा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक्ट भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया और इसे 30 जनवरी 1990 में सारे भारत में लागू कर दिया गया. इस कानून को बनाने के पीछे की मुख्य वजह थी अनुसूचित जातियों और जनजातियों के खिलाफ अपराध करने वालों को दंडित करना. ये तो हुआ इस एक्ट का इतिहास अब हम आपको बताते हैं कि वर्तमान में जो भारत बंद अनुसूचित जातियों और जनजातियों द्वारा किया गया उसके पीछे वजह क्या थी. दरअसल महराष्ट्र के एक सरकारी अधिकारी सुभाष काशीनाथ महाजन पर एससी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एक शख्स ने आरोप लगाया कि, उनपर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले दो जूनियर कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्यावाही करने पर महाजन ने रोक लगाई. एससी समुदाय के शख्स का कहना था कि उन दो कर्मचारियों ने उसपर जातिसूचक टिप्पणियां की थीं.

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काशीनाथ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 

इसके बाद काशीनाथ महाजन ने खुद को निर्दोष बताया और FIR खारिज कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया लकिन बॉम्बे उच्च न्यायालय ने इससे इनकार किया. इसके बाद महाजन ने हाईकोर्ट के फैसले को भारत के उच्च न्यायालय में चुनौती दे दी. शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि महाजन के खिलाफ की गयी FIR खारिज की जाए. इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि अनुसूचित जाति/जनजाति एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी जाए. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देने की मंजूरी भी दे दी थी.

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने दलित संगठनों में खलबली मचा दी थी. उसी वक्त से सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का विरोध होना शुरू हो गया था. इसके बाद कई दलित संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस मामले में केंद्र सरकार का रुख जानने की कोशिश की उन्होंने केंद्र सरकार से कहा कि वो इस मसले पर अपना रुख स्पष्ट करे, जिसके बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने कहा कि सरकार इस मसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी.

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भारत बंद और उपद्रव 

20 मार्च 2018 को जब सुप्रीम कोर्ट ने इसपर फैसला सुनाया तो दलित संगठनों को यह फैसला पसंद नहीं आया. कोर्ट ने कहा कि हम एक्ट के खिलाफ नहीं हैं लेकिन किसी बेगुनाह को गिरफ्तार करना भी गलत है. इस फैसले में कोर्ट ने तुरंत गिरफ्तारी न किए जाने का आदेश दिया. इस फैसले से दलित संगठन खुश नहीं हुए और उन्होंने भारत बंद का ऐलान कर दिया. 2 अप्रैल को भारत बंद हुआ और इस बंद से देश को भारी नुकसान हुआ. इस बंद में कई दुकानों को तोड़ दिया गया, सार्वजनिक संपति को नुकसान पहुंचा दिया गया यहाँ तक कि इस उपद्रव में हिस्सा लेने वालों ने छोटे-छोटे ठेले चलाकर जिंदगी काटने वालों के ठेल भी जला डाले. उपद्रवियों ने जिस तरह का कोहराम मचाया उससे सवाल उठता है कि यदि एससी/एसटी एक्ट पर रोक लगाना गलत था तो क्या उसके विरोध में करोड़ों की सम्पत्ति का नुकसान करना सही था.

आपको बता दें कि ऐसा ही फैसला मायावती ने उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार के दौरान दिया था.  उन्होंने भी इस बात पर जोर दिया था कि किसी निर्दोष को सजा नहीं दी जानी चाहिए और अगर कोई किसी पर गलत आरोप लगाते पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.

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बहुरूपी दंगाइयों के खिलाफ योगी सरकार का फैसला

ऐसे में सवाल ये उठता है कि अब सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है उसपर इतना उपद्रव कैसे हो गया. इसके पीछे इसाई मिशनरियों का हाथ भी हो सकता है क्योंकि वो हिंदू जातियों को कमजोर करने की कोशिश हमेशा से करते रहे हैं. इसके अलावा राजनीतिक पार्टियों ने भी इसमें अपना फायदा देखा उन्होंने बीजेपी को कमजोर करने के लिए इस बंद का समर्थन किया और जब दंगे शुरू हुए तो कई राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने अपने मन की भड़ास निकालने के लिए तोड़फोड़ मचाई.

आजतक की खबर के अनुसार उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अब आदेश दिया है कि जल्द से जल्द इस हिंसा के पीछे के हर शख्स को चिन्हित कर पकड़ा जाए, ऐसे लोगों पर पुलिस रासुका लगाएगी. आपको बता दें कि दंगों में शामिल अगर कोई गैर एससी/एसटी पकड़ा गया तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही हो सकती है. भारत बंद के दौरान कई गैर एससी/एसटी लोगों को भी उपद्रव मचाते पाया गया था. ऐसे ही एक उपद्रवी का जिक्र बीजेपी की नेता सोनम महाजन ने एक ट्वीट के जरिये भी किया था.

सोनम महाजन ने ट्विटर पर एक पोस्ट करते हुए बताया था कि जो इंसान करणी सेना के आंदोलन के समय राजपूत था वो एससी/एसटी आंदोलन के वक्त पिछड़ी जाती का बना गया. सोनम ने लिखा, “इस लड़के में ख़ास कला है. ये लड़का करणी सेना के आन्दोलन के समय राजपूत था और अब जब कांग्रेस पार्टी ने भारत बंद का ऐलान किया तो ये भीम आर्मी का हिस्सा भी है. मुझे तो शक है कि ये लड़का हिन्दू भी है कि कांग्रेस ने किसी मुस्लिम को पैसे देकर खरीदा है.”

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अब आपको इस पूरी खबर को पढ़कर पता चल गया होगा कि आखिर ये एससी/एसटी आंदोलन क्या है. किस तरह ये इतना घातक साबित हुआ और कैसे कुछ पार्टियों ने इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की.