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साल 2000 के बाद पहली बार मोदी सरकार में बना एक गजब का रिकॉर्ड कि…

इस साल का मानसून सत्र 10 अगस्त को घर खरीदने वालों के लिए एक संशोधन विधेयक को पारित करने के साथ ही खत्म हो गया.  काम के लिहाज से देखा जाय तो यह सबसे अच्छा सत्र रहा है. इस सत्र में कई ऐसे रिकार्ड बने जो मोदी सरकार के लिए इतिहास बन गए. इस मानसून सत्र में लोकसभा और राज्यसभा दोनों में रिकार्ड काम हुए. लोकसभा में निर्धारित समय से 10 फीसदी ज्यादा काम हुआ तो वहीं राज्यसभा में भी 66 फीसदी ज्यादा काम हुआ. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र की सरकार इस बार कई सत्र से लटके पड़े विधेयकों को पारित करा कर नई मिसाल पेश की है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी: (Image Source-Farkindia)

साल 2000 के बाद पहली बार मानसून सत्र में इतना काम हुआ

संसद के मानसूत्र सत्र के इतिहास में वर्ष 2000 के बाद पहली बार इतना काम हुआ है. आंकड़ों के अनुसार संसद में 20 बिल पेश किये गए जिसमें से 18 पास हुए हैं. लोकसभा और राज्यसभा दोनो सदनों में हंगामें की भरपाई के लिए ज्यादा वक्त दिया गया. यही वजह रही कि लोकसभा में 10 प्रतिशत और राज्यसभा में 66 प्रतिशत ज्यादा काम हुआ. यह अपने आप में एक रिकार्ड है.

संसद के मानसून सत्र के इतिहास में  साल 2000  के बाद पहली बार इतना काम हुआ: (Image source-doonited)

 

इसके अलावा इस बार का मानसून सत्र कानून निर्माण के लिए जाना जायेगा. इस बार के सत्र मेंं लोकसभा में 50 फीसदी तो राज्यसभा में 48 फीसदी समय कानून निर्माण के लिए दिया गया. जो इस सरकार द्वारा दिया गया सबसे ज्यादा समय है.

मोदी सरकार को होगा बड़ा फायदा

मोदी सरकार ने कानून निर्माण को लेकर इस मानसून सत्र में सबसे ज्यादा समय दिया. जिसमें राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देना और एसटी/एससी एक्ट के तहत तुरंत गिरफ्तारी को कानून का रुप देना शामिल है. यह मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और इससे सरकार को 2019 लोकसभा चुनाव में बड़ा फायदा मिल सकता है.

संसद में पीएम मोदी: (Image Source-sthindia)

 

पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार की तरफ से 16 वीं लोकसभा में सबसे ज्यादा बिल कानून एवं न्याय मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से संसद में पेश किए गए. दोनों सदनों के स्पीकरों ने भी यह माना कि बजट सत्र के मुकाबले इस बार 3 गुना ज्यादा काम हुआ. बीजेपी के नेतृत्व वाली केन्द्र की सरकार इसे सकारात्मक कदम मान कर चल रही है. इससे न केवल आम जनता में  मोदी सरकार की विश्वसनीयता बढे़गी बल्कि एक अच्छा संदेश भी जायेगा.

 

आपसे एक सीधा सवाल

सदन के इस व्यवहार से आपको लगता है कि सांसद पहले की अपेक्षा संसद के प्रति जवाबदेह हुए हैं?

News Source-NBT