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पीएम मोदी के इस फैसले से यकीन मानिये हर भारतीय का मान बढ़ेगा

उपग्रह प्रक्षेपण के मामले में भारत नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. भारतीय वैज्ञानिकों के कठिन परिश्रम की बदौलत भारत ने समृध्दि और विकास के नए कीर्तिमान गढ़े हैं. भारत ने अपने पहले चन्द्र मिशन ‘चन्द्रयान-I’ को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया और अब चन्द्रयान-II को भेजने की तैयारियां चल रही हैं. इसके अलावा भारत पिछले कुछ वर्षों मे दुनिया में सबसे कम लागत पर अंतरिक्ष संबंधी सेवा प्रदाता कंपनी के रुप में अपने आपको स्थापित किया है. अब पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने अंतरिक्ष कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए एक कदम और आगे बढ़ाते हुए बुधवार को ऐसा काम किया है जिससे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम मे चार चांद लग जायेगें.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी: (Image Source)

पीएम मोदी ने इसरो के लिए मंजूर किए 10911 करोड़ रुपये-

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने बुधवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि की ‘इसरो’ के लिए 10911 करोड़ रुपये के वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है. इस राशि का उपयोग भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम मे किया जायेगा. इस राशि का उपयोग अगले 4 साल तक 30 पीएसएलवी और 10 जीएसएलवी एमके-3 रॉकेट्स को लॉच करने मे किया जायेगा.

इसरो द्वारा सैटेलाइट लॉचिंग का एक दृश्य़: (Image Source)

केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने इस मिशन के बारे मे बोलते हुए कहा- ”जीएसएलवी एमके-3 कार्यक्रम मोदी सरकार द्वारा पिछले तीन सालों के अंदर कार्यान्वित और विकसित हुआ है और यह मेक इन इंडिया कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है. यह पूरी तरह से भारतीय तकनीक पर आधारित है. इस जीएसएलवी कार्यक्रम के तहत भारत न केवल विदेशी मिनी सैटेलाइट को लॉच करेगा बल्कि उनके 4 टन वजनी सैटेलाइट को भी लॉच कर सकेगा.”  

इस मिशन के लिए इतने खर्च किए जाएंगे-

पीएसएलवी-

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को 30 पीएसएलवी रॉकेट्स लॉच करने के लिए मोदी कैबिनेट ने 6573 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसके अलावा ‘इसरो’ में निजी भागीदारी को भी बढ़ावा दिया गया है.जिससे अंतरिक्ष के क्षेत्र में नए इनोवेशन देखने को मिलेेगें साथ ही आम जनता की भागीदारी बढ़ने से यह क्षेत्र आने वाले समय मे प्रगति के नए आयाम छुएगा. अंतरिक्ष कार्यक्रम के अलावा भारत अक्टूबर से नवंबर के बीच चन्द्रयान-II को लॉच करने की तैयारी कर रहा है. यह भारत के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नही है.

इसरो का जीएसएलवी पेलोड वाहन: (Image Source)

जीएसएलवी-

10 जीएसएलवी एमके-3 के लॉचिंग के लिए मोदी सरकार ने 4338 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. जीएसएलवी इसरो का सबसे भारी रॉकेट है और इससे 4 टन से भारी उपग्रहों को अतंरिक्ष में भेजा जा सकेगा. इस तकनीक के पूरी तरह से काम करने के बाद भारत को वजनी सैटेलाइट लॉच करने के लिए विदेशी स्पेस लॉचिंग साइट पर निर्भर नही रहना पड़ेगा.

जीएसएलवी पेलोड वाहन: (Image Source)

मोदी सरकार द्वारा इस महात्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ताकत और ऊर्जा मिलेगी. जनसंचार, भू-परीक्षण और नेवीगेशन के क्षेत्र में सैटेलाइट लॉचिंग की संख्या बढ़ने से आम आदमी को काफी फायदा मिलेगा. साथ ही पीएम मोदी द्वारा दिया गया नारा ‘सबका साथ सबका विकास’ अब जमीनी परिवेश में स्थापित होने मे भी यथार्थ साबित होगा.

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की इस नई ऊंचाई को देख चीन और पाकिस्तान जैसे देश भी अब शांत नही बैठेगें. भारत का चन्द्रयान मिशन नई उपलब्धियों को छू रहा है साथ ही इन नए उपग्रहों के प्रक्षेपण से भारत का न केवल रक्षा क्षेत्र मजबूत होगा बल्कि इससे संचार माध्यमों को विकसित करने मे सहूलियत होगी. पाकिस्तान और चीन टकटकी लगा कर भारत के आंतरिक सुरक्षा संबंधी मिशनों पर ध्यान रखते हैं इसलिए इन देशों का जलना स्वाभाविक ही है. हांलाकि भारत को इससे खास असर नही होने वाला है.

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