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बुक से हुआ खुलासा : ओबामा मनाते रहे पीएम मोदी को लेकिन मोदी… जानिए क्या थी असली बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जलवा अब विश्व पटल पर छा गया है इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता. जिस तरह से पीएम मोदी ने देश की सत्ता संभालने के बाद अपने फैसलों से विश्व पटल पर धाक जमाई है उससे भारत का नाम भी दुनिया में रोशन हो रहा है. पीएम मोदी से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी पीएम मोदी को मनाने में जुट गए थे. आखिर क्या था पूरा माजरा हम बताते हैं आपको.

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इस बात को तो सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि जब अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके बेहद दोस्‍ताना ताल्‍लुकात थे. यहां तक कि जब बराक ओबामा पहली बार गणतंत्र दिवस के मुख्‍य अतिथि के रूप में भारत आए तो पीएम मोदी ने उनको ‘बराक’ कहकर संबोधित किया. लेकिन कूटनीति की दुनिया में राष्‍ट्र हित सर्वोपरि होता है. इसकी मिसाल 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी ने पेरिस जलवायु समझौते के मौके पर बराक ओबामा के साथ बातचीत में पेश की.

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ओबामा शासन काल के दौर में उनकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में शीर्ष सलाहकार रहे बेन रोड्स ने अपनी किताब ‘द वर्ल्ड एट इट इज: ए मेमोइर ऑफ द ओबामा व्हाइट हाउस’ पीएम मोदी को लेकर एक खुलासा किया है. बता दें कि बेन रोड्स की यह किताब छह जून को बाजार में आने वाली है.

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2015 में पेरिस जलवायु समझौते के दौरान रोड्स रणनीतिक वार्ता के मामले में ओबामा के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे. उन्‍होंने अपनी किताब में खुलासा किया है, ”जब हम पेरिस पहुंचे तो सबसे बड़ा काम भारत को मनाना था.” जलवायु समझौते के दौरान भारत-अमेरिका के बीच हुई अंतिम दौर की बातचीत का विस्तृत ब्योरा देते हुए रोड्स कहते हैं कि भारत को मनाने के लिए बराक ओबामा ने वहां के दो वार्ताकारों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की, लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली.

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इसके आगे रोड्स ने लिखा है कि जिसके बाद मोदी और ओबामा की मुलाक़ात हुई. करीब एक घंटे तक पीएम मोदी इस तथ्य पर जोर देते रहे कि उनके यहां 30 करोड़ लोगों के पास बिजली नहीं है और भारतीय अर्थव्यवस्था को वृद्धि देने के लिए कोयला सबसे सस्ता माध्यम है. उन्हें पर्यावरण की चिंता है, लेकिन उन्हें गरीबी से जूझ रहे लोगों की भी चिंता करनी है. जिसके बाद ओबामा ने उन्हें सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उठाए गए कदमों, बाजार में बदलाव के कारण स्वच्छ ऊर्जा की लागत में आई कमी जैसी दलीलें दीं. मोदी जी ने देश के विकास के लिए बराक ओबामा की बात को भी सुनना पसंद नहीं किया.

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किताब के अनुसार, ”लेकिन अब तक उन्होंने इस भेदभाव पर कुछ नहीं कहा था कि अमेरिका जैसे देशों ने अपना विकास कोयले से किया और अब वह भारत से ऐसा नहीं करने की मांग कर रहा है. बराक ओबामा ने अंत में कहा, देखिए, मैं मानता हूं कि यह सही नहीं है. मैं अफ्रीकी-अमेरिकी हूं. मोदी जानबूझकर मुस्‍कुराए और अपने हाथों की ओर देखा. वह बहुत दुखी लग रहे थे.”

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इस दौरान ओबामा ने कहा कि ”मुझे मालूम है कि देर से शुरुआत करना कैसा होता है, और अपने हिस्से से ज्यादा मेहनत करने को कहा जाना और ऐसा दिखाना कि कोई भेदभाव नहीं हुआ है, कैसा लगता है, लेकिन मैं उसके आधार पर अपनी पसंद तय नहीं करूंगा, आपको भी ऐसा नहीं करना चाहिए.” रोड्स ने जिस तरह से मोदी और ओबामा के बीच के रिश्ते को बयां किया है आप समझ सकते हैं कि उन दोनों नेताओं में किस तरह की जुगलबंदी रही होगी.

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